इन दिनों : ईरान एक सीख भी है और सबक भी

"धर्म मनुष्य की एक कमजोर नस है, जिसे सहला कर सत्ता तो प्राप्त कर सकते हैं, लेकिन बुनियादी समस्याओं को सुलझा नहीं सकते। जो देश धार्मिक बन गये हैं, उस देश की जनता लोकतांत्रिक शासन चाहती है। और, जो देश धार्मिक बन नहीं पाया, उस देश में धार्मिक कट्टरता सत्ता दिला रही है।" इसी आलेख से
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प्रोफेसर, पूर्व विभागाध्यक्ष, विश्वविद्यालय हिन्दी विभाग

पूर्व डीएसडब्ल्यू,ति मां भागलपुर विश्वविद्यालय,भागलपुर

डॉ योगेन्द्र
डॉ योगेन्द्र

प्रोफेसर, पूर्व विभागाध्यक्ष, विश्वविद्यालय हिन्दी विभाग

पूर्व डीएसडब्ल्यू, ति मां भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर

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3 Comments

  1. धर्म के नाम पर स्थापित सत्ता के जनविरोधी अपरिहार्यता की पोल खोलते हुए वस्तुनिष्ठ आलेख. साधुवाद

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