धूप खिली है। ठंड है भी और नहीं भी। सुबह ठंड रहती है। धूप उगते ही ठंड अपनी दुनिया समेट लेती है। दिसंबर के महीने में हाड़ कंपा देने वाली ठंड पड़ती थी। प्रेमचंद ने ‘पूस की रात’ नामक कहानी इसी माह को केंद्रित कर लिखी थी। कहानी के नायक हल्कू का कंपकंपाता शरीर। न कंबल, न शरीर पर कपड़े। अंधेरी रात और चारों तरफ खुला-खुला। ठंड देह को बर्फ बना रही थी। अब वह ठंड कहां? मौसम ठंडा हो, लेकिन मन मौसम की तरह ठंडा नहीं रहता।
मेरे ही मन में कितनी बातें आ रही हैं! कंप्यूटर तो चलाने से चलता है, मन बिना चलाये भी चलता रहता है। दिसंबर के अंत का मतलब 2025 का अंत। अमेरिका को लेकर एक डेटा अखबार में छपा है। 2025 में अमेरिका में 389 सामूहिक गोलाबारी हुई, जिनमें 70 स्कूलों में हुई। ऐसी खबरें ठंड में भी गर्मी पैदा करती हैं। अमेरिका एक विकसित राष्ट्र है। दुनिया भर के लोग पैसा कमाने अमेरिका पहुँचते हैं। वैध ढंग से तो जाते ही हैं, अवैध ढंग से भी अमेरिका में प्रवेश करते हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ऐसे अवैध प्रवासियों को जंजीरों में बाँध कर वापस उसके देश भेजा। मानव गरिमा ताख पर रख दी गई और उसे तार-तार करते हुए राष्ट्रपति गर्वोक्ति से उच्चारते रहे। उन्होंने तमाम तरह के गोरखधंधे कर एम्पायर खड़ा किया और विभिन्न तरीकों का इस्तेमाल कर राष्ट्रपति हो गये।
दुनिया में आदमी-आदमी के बीच, शहर और गाँव के बीच, राज्य और राज्य के बीच और राष्ट्र और राष्ट्र के बीच आर्थिक खाई बढ़ी है। हमने एक अशांत दुनिया बनाई है। ज्ञान के विस्फोट हो जाने के बाद भी हमने सम्मान के साथ जीना नहीं सीखा है और न दूसरे को सम्मान के साथ जीने देना चाहते हैं। नफ़रत और हिंसा मूलमंत्र बन गई है। कल ही आस्ट्रेलिया के सिडनी शहर में त्यौहार मना रहे यहूदियों पर गोलाबारी हुई। 11 लोग मारे गए, 29 घायल हैं। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू इससे बहुत दुखी हुए और चिंता जताई है।
दरअसल ऐसे ही प्रधानमंत्रियों ने संप्रदाय की राजनीति कर विश्व को इस ‘मुकाम’ तक पहुँचाया है। ज्यादातर प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति की यही हालत है। वे मानव के लिए राजनीति नहीं करते, वे हिंसा और नफ़रत की राजनीति करते हैं। भारत की भी यही हालत है और अमेरिका की भी। प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति की केवल बोली सुन लीजिए। वे हर वक्त किसी न किसी के खिलाफ विष-वमन करते रहते हैं। करुणा, सहानुभूति, संवेदना – उनकी चेतना में मौजूद ही नहीं रहती। इजरायल ने गाजा के साथ क्या किया? फिलिस्तीन की जमीन पर यहूदी बसे और फिर उन्होंने एक अलग देश बना लिया। इसके बाद वे फिलिस्तीनियों को पीटने लगे। कितनी तबाही हुई!
धर्म चुनी हुई चीज है। वह मनुष्य निर्मित है। यही वजह है कि दुनिया में अनेक धर्म हैं। आगे भी रहेंगे। बावजूद इसके धर्म के नाम पर जितनी हिंसा हुई है, शायद ही पिछले दो विश्व युद्धों में हुई हो।
ज्ञान महज तर्कों पर आश्रित हो और उसमें करुणा न हो, तो वह तलवार की धार से भी तीक्ष्ण होता है और किसी भी समाज और सभ्यता की गर्दन उड़ा सकता है। अभी तो हालत यह है कि जिसके पास ज्ञान है, उनमें से बहुत कम लोगों के पास करुणा है और जिसके पास अज्ञानता है, वे अंधश्रद्धा में डूबे हैं। मनुष्य छटपटा रहा है। ऐसी ही विकट परिस्थिति में महात्मा बुद्ध याद आते हैं। वे तार्किक भी थे और करुणा के महासागर भी। मनुष्य का ह्रदय बुद्ध की तरह ही होना चाहिए, तभी संसार में शांति और वास्तविक समृद्धि आयेगी।

प्रोफेसर, पूर्व विभागाध्यक्ष, विश्वविद्यालय हिन्दी विभाग
पूर्व डीएसडब्ल्यू,ति मां भागलपुर विश्वविद्यालय,भागलपुर







phuket apartments for sale [url=apartments-for-sale-in-phuket-5.com]phuket apartments for sale[/url]
кухни на заказ от производителя [url=https://kuhni-spb-59.ru]кухни на заказ от производителя[/url]
кухни на заказ от производителя в спб [url=https://kuhni-spb-61.ru]кухни на заказ от производителя в спб[/url]
jili slot malaysia [url=100cuci-7.com]jili slot malaysia[/url]
капельница от запоя клиника [url=https://kapelnicza-ot-pokhmelya-samara-24.ru]https://kapelnicza-ot-pokhmelya-samara-24.ru[/url]
[…] इन दिनों : तर्क, ज्ञान और अंधश्रद्धा […]
[…] इन दिनों : तर्क, ज्ञान और अंधश्रद्धा […]