इन दिनों : होली के रंग और ज्ञान के संग

"इधर के दिनों में सभी हिन्दू पर्वों की व्याख्या हो रही है। होली की भी। हिरण्यकश्यप और प्रह्लाद की कथा में मन प्रह्लाद के पक्ष में रहता था। इधर पता चला कि प्रह्लाद का तो इस्तेमाल किया गया। ......." - इसी आलेख से
“तुम सभ्य तो हुए नहीं
नगर में बसना
भी तुम्हें नहीं आया।
एक बात पूछूँ--(उत्तर दोगे?)
तब कैसे सीखा डँसना--
विष कहाँ पाया?”
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प्रोफेसर, पूर्व विभागाध्यक्ष, विश्वविद्यालय हिन्दी विभाग

पूर्व डीएसडब्ल्यू,ति मां भागलपुर विश्वविद्यालय,भागलपुर

डॉ योगेन्द्र
डॉ योगेन्द्र

प्रोफेसर, पूर्व विभागाध्यक्ष, विश्वविद्यालय हिन्दी विभाग

पूर्व डीएसडब्ल्यू, ति मां भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर

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