तरबूज़ के टुकड़े की तरह चाँद आकाश में लटका है। उन देशों में जहाँ गोले बरस रहे हैं, वहाँ भी देर-अबेर आकाश में चाँद ऐसा ही लटकता होगा! क्या इन चाँदों के बारे में युद्धरत सिपाही कभी सोचते होंगे? आम लोगों और सिपाहियों की लाशें, उनके चीथड़े, झुलसे पौधे, काली होती धरती और घरों के ध्वंस क्या आदमखोर राष्ट्राध्यक्षों की चेतना में कभी खलबली नहीं मचाते होंगे? चाँद कभी या किसी क्षण ऐसे धरती के बोझों के मन में कोई कौतूहल पैदा नहीं करता होगा? इस सृष्टि के जीवनदायी पानी, हवा और धरती को मनुष्य ने नहीं बनाया, न चाँद, सूरज और तारों को, फिर इसे बम और बारूद से नष्ट करने की इजाज़त कैसे मिल गई? उसने धरती बाँटी, पानी बाँटा ही नहीं लूटा और अब धरती के अंदर मौजूद संसाधनों को लूटने को बेताब है।
आज जिस तरह से ट्रंप, नेतन्याहू, पुतिन और इन जैसे लोगों ने धरती पर कुहराम मचा रखा है कि लगता नहीं है कि मनुष्यता कहीं जीवित है या फिर ज्ञान का कोई विस्फोट हुआ है। जैसे गली का गुंडा दूसरे के घरों में मौजूद संसाधनों को लूट लेता है, वैसा ही व्यवहार ट्रंप कर रहे हैं । झूठ बोल कर दूसरे देशों को बदनाम कर और धमका कर अपनी भीषण कार्रवाई को मान्यता प्रदान करवा लेते हैं और संसाधनों की लूट करते हैं। मनुष्य की लिप्सा ही संसार के नाश का कारण बनेगी । प्रकृति की किसी भी चीज़ को मनुष्य ने निर्मित नहीं किया, फिर इन पर मनुष्य का एकाधिकार क्यों हो? ये तमाम चीज़ें सबके लिए हैं और किसी लालची तानाशाह को इसे बर्बाद करने की छूट देना मनुष्यता के साथ द्रोह है।
बुद्ध और गांधी होने के लिए उदात्त आत्मबल की ज़रूरत होती है। भारत बुद्ध और गांधी का देश है। इसने संकटग्रस्त दुनिया को अहिंसा और महाकरूणा का संदेश दिया है। खाड़ी देशों में मची तबाही के बीच भारत के राष्ट्राध्यक्ष की चुप्पी अनैतिक है। यह चुप्पी बताती है कि आप ख़ूँख़ार भेड़िए के पक्ष में हैं। इस युग में धर्म पूरी तरह इस्तेमाल की चीज़ बन गया है। खोमनई या ट्रंप या नेतन्याहू को धर्म से क्या मतलब? और अगर वे धर्म की दुहाई देते हैं तो क़ुरान, बाइबिल और तनाख क्या उनको ऐसा करने की इजाज़त देता है? धर्म अगर मृत्यु का तांडव है या मौत का नंगा नाच है, तो ऐसे धर्म को दूर से प्रणाम कर लेना चाहिए। ये लोग धर्म की राजनीति कर रहे हैं, जैसे नरेंद्र मोदी कर रहे हैं। यह वजह है कि तीनों- ट्रंप, नेतन्याहू और नरेंद्र मोदी एक स्थल पर खड़े नज़र आते हैं।
धर्म का बेजा और ख़ूनी इस्तेमाल उन लोगों ने सत्ता पर क़ाबिज़ होने और लूट मचाने के लिए किया है। नेतन्याहू को अब ग्रेटर इज़राइल चाहिए और अमेरिका की ख्वाहिश है कि फर्स्ट पायदान पर बना रहे, चाहे दुनिया बर्बाद हो जाए। भारत के विदेश मंत्री कहते हैं कि भारतीयों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता। सही है भाई। विश्व गुरु बनने की इच्छा क्यों पाल रखी है? केंचुआ बन कर भारतीयों को तो क्या, अपने घर की रक्षा नहीं कर सकते। अन्याय के ख़िलाफ़ नहीं बोलना और यह कहना कि भारतीयों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है तो क्या तुम्हारी प्राथमिकता यह नहीं है कि नेशन का स्वाभिमान बचे? अपने को खो कर अपने को कैसे पाओगे भाई! जंजीरों में बँधे भारतीय जब विमान से उतरे तो क्या बचा लिया? नरेंद्र मोदी जी ने कहा था कि मेरा शासन आने दो, अमेरिका भारत आने के लिए वीसा की क़तार में खड़ा होगा। कहाँ है वह क़तार? झूठ-साँच करने से व्यापार चल सकता है, देश नहीं।

प्रोफेसर, पूर्व विभागाध्यक्ष, विश्वविद्यालय हिन्दी विभाग
पूर्व डीएसडब्ल्यू,ति मां भागलपुर विश्वविद्यालय,भागलपुर







