गोवा की खास शराब है – फेनी। फेनी काजू और नारियल से बनती है। यहाँ सहजता पूर्वक नारियल भी उपलब्ध है और काजू भी। काजू की बेहतरीन किस्में यहाँ मिलती हैं। पणजी गोवा की राजधानी है और यहाँ के एक पूरे मुहल्ले को धरोहर घोषित कर दिया गया है। यह मुहल्ला मांडवी नदी के किनारे बसा है। यहाँ के घर पुर्तगालियों ने बनाये हैं और तीन-चार सौ वर्ष पुराने हैं। घरों की डिजाइन मौसम के अनुकूल है और अभी तक ज्यों-की-त्यों कायम है। 1961 में गोवा आजाद होने के बाद पुर्तगाली चले गए तो इन घरों पर स्थानीय लोगों का कब्जा हुआ। नये घर और नये निर्माण भी हो रहे हैं, लेकिन वे इन मकानों से टक्कर नहीं ले पाते। वे बनते हैं और ढहने लगते हैं। आपने सुना ही होगा कि नवनिर्मित राम मंदिर और संसद भवन तक बारिश को सहन नहीं कर सके और पानी चूने लगा था। नये जो निमार्णकर्ता हैं, उन्हें भ्रष्टाचार में अत्यधिक रूचि है। खैर, यहीं पर आदिल शाह पैलेस है। 2012 तक इसी पैलेस में गोवा की सरकार चलती थी। अब सरकार चलाने के लिए दूसरा भवन बनाया गया है। पुर्तगालियों के आने के भी किस्से हैं। जिन लोगों ने स्थानीय बादशाह से मुक्ति के लिए पुर्तगालियों को न्योता, उनके भी मकान इसी मुहल्ले में हैं। यह मकान आदिल शाह पैलेस के सामने है।
गोवा के शहर और गाँव में बहुत अंतर नहीं है। बस या कार से जब आप चलेंगे तो स्थानीय घरों को देख कर पता करना मुश्किल होता है कि ये घर गाँव के हैं या शहर के। बहुत से घरों की छत चौड़े वाले खपड़ों से बनी है। यहाँ की आबादी बहुत घनी नहीं लगती। पेड़ों की अधिकता के कारण प्रदूषण का बहुत असर नहीं है। ज्यादातर घरों और उसके आस-पास लंबे-लंबे कसेली और नारियल के पेड़ मिलते हैं। गोवा महँगा शहर है। समुद्री किनारों पर तो चीजें और भी महँगी हो जाती है। कल मैंने दो और समुद्री किनारे देखे – ऐरोसील और कोलवा । ऐरोसील पर विदेशी पर्यटक बहुतायत से थे और कोलवा पर भारतीय पर्यटक। ऐरोसील का समुद्र देखने लायक है। यों मीराबार बहुत चर्चित समुद्री किनारा है, मगर वहाँ के पानी में गंदगी नजर आयी। लहरों के पास गया तो काली-काली पत्तियों के टुकड़े थे। बहुतायत से सफेद छोटे-छोटे केंकड़े लहरों के साथ आते और जैसे ही लहरें उतरतीं, वे गीले रेत में प्रवेश कर जाते। ऐरोसील समुद्री किनारे पर आप देर तक बैठ सकते हैं और चाहें तो लहरों पर तैर भी सकते हैं। देर तक लहरों के बीच चलते हुए सुखद अहसास होता रहा।
कोलवा में भीड़ ज्यादा थी। लहरें भी अपेक्षाकृत ज्यादा ऊँची थीं। तैरने के लिए जगह निर्धारित थी। मौज मस्ती के लिए नावें मौजूद हैं। हवा में उड़ने के लिए स्काइकिंग के भी इंतजाम हैं। यहाँ जो मित्र हैं, उनकी एक संस्था है। रहने और खाने के इंतजाम हैं तो खर्चे में बहुत कटौती हो गयी। सामान्य आर्थिक परिवार के लिए यहाँ थोड़ी कठिनाई होगी। हम लोग पाँच साथी थे। साथ-साथ चल रहे थे और आपस में वैचारिक बहसें भी हो रहीं थीं। गोवा में भी जो साथी हैं, उनसे भी बहस हुई। नब्बे प्रतिशत बहसें बीते हुए वक्त और उस गौरवशाली इतिहास पर केंद्रित थीं, जो बीत चुकी हैं।
एक नया वक्त हमारे सामने है जो गांधी, लोहिया और जयप्रकाश की विरासत को हड़पने, उसे लांछित करने और जनता की चेतना से उच्छेद करने में तत्पर है । यह सर्वथा नयी चुनौती है। जो हमलावर हैं, उनकी एक संगठित सेना है और हर गुणों में निपुण हैं। वे सिर्फ जीतना और हड़पना चाहते हैं, चाहे तरीके जो हों। चंगेज ख़ाँ या जो भी आक्रमणकारी आये, उन्हें लूटना था। वे बेहद निर्मम थे। कमोबेश उसी स्वभाव के लोगों से आज पाला पड़ा है। वे किसी भी सीमा तक जा सकते हैं। उनकी नैतिकता में कब अनैतिकता प्रवेश कर जायेगी और कब अनैतिकता में नैतिकता कहा नहीं जा सकता। उन्हें रूप और बोली बदलने में देर नहीं लगती।

प्रोफेसर, पूर्व विभागाध्यक्ष, विश्वविद्यालय हिन्दी विभाग
पूर्व डीएसडब्ल्यू,ति मां भागलपुर विश्वविद्यालय,भागलपुर






