इन दिनों : कारवाँ गुजर गया, ग़ुबार देखते रहे 

"आज अपने इतिहास को ठीक से समझने की ज़रूरत है। एक बार फिर देश में खतरा मँडरा रहा है। " - इसी आलेख से

माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दूसरे सरसंघचालक थे। उन्होंने तीन दुश्मन चुने थे- मैकाले, मार्क्सवादी और मुसलमान। लेकिन उन्होंने पहले टारगेट किया- गांधी को। गांधी की हत्या में प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष ढंग से इनका हाथ था। मैकाले से कभी उन्होंने लड़ाई नहीं की। उनके नायक हिटलर और मुसोलिनी रहे। उनका ड्रेस किसी भी तरह से स्वदेशी नहीं है। काली टोपी आख़िर आयी कहाँ से? भारत में मुरेठा हो या टोपी – कभी भी काली नहीं रही। यह फासीवादी चरित्र के नायकों मुसोलिनी और हिटलर से प्रभावित है।

आर एस एस के मुंजे सहित कई नेता 1931 में मिले थे। हिटलर नस्लीय शुद्धता के पक्षधर थे । उससे प्रभावित आर एस एस के सरसंघचालकों की सूची देखिए तो आपको साफ़-साफ़ पता चलेगा कि वे सब उच्चवर्णी क्यों हैं? सौ साल के आर एस एस के इतिहास में एक भी सरसंघचालक न पिछड़ी जाति के हैं, न दलित-आदिवासी से। आख़िर ऐसा क्यों है? क्या पिछड़ी-दलित जातियों और आदिवासियों में एक भी ऐसे प्रतिभा संपन्न व्यक्ति नहीं है, जो सरसंघचालक बन सके।

वे मैकाले को अपना दुश्मन मानते हैं, लेकिन वे मैकाले से कभी नहीं लड़े। आज़ादी की लड़ाई में वे अंग्रेज़ों के साथ रहे। सावरकर टू नेशन थ्योरी के जनक हैं। माफ़ी माँग कर जब जेल से बाहर आये तो यह महान थ्योरी देश के सामने रखी। इनके लोग गांधी और नेहरु को देश विभाजन के लिए ज़िम्मेदार मानते हैं। सच्चाई यह है कि उन्होंने देश विभाजन की थ्योरी भी दी और जब देश विभाजित हो रहा था, तब वे सिर्फ़ चुप नहीं रहे। बंगाल और सिंध में मुस्लिम संगठनों के साथ मिल कर राजपाट चला रहे थे और कांग्रेस के खिलाफ विष-वमन कर रहे थे। 

आज अपने इतिहास को ठीक से समझने की ज़रूरत है। एक बार फिर देश में खतरा मँडरा रहा है। आरएसएस – बीजेपी हिन्दू-हिन्दू कर रहा है और उधर औबेसी- हुमायूं कबीर मुसलमान-मुसलमान कर रहे हैं। हमने आज़ादी के आंदोलन में हुई भूलों से सीखा नहीं, बल्कि उसके नक़्शेक़दम पर चल पड़े हैं। हुमायूं कबीर ने बंगाल में बाबरी मस्जिद का शिलान्यास किया और नरेंद्र मोदी की सरकार ने इस आदमी को राजकीय सुरक्षा प्रदान की। आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत को जेड सुरक्षा प्राप्त है और हुमायूं कबीर को वाई सुरक्षा। दोनों न प्रधानमंत्री हैं, न मुख्यमंत्री हैं, न मंत्री।

आरएसएस के पास तो सैनिक मौजूद हैं। हर दिन प्रैक्टिस करते हैं। क्या वे अपने सेना- नायक की सुरक्षा नहीं कर सकते। आप समझिए कि हिन्दू और मुस्लिम के कट्टर नायकों को राजकीय सुरक्षा सरकार दी रही है। क्यों? हुमायूं कबीर ने बाबरी मस्जिद की नींव रखी, जिस बाबरी मस्जिद के ख़िलाफ़ आरएसएस-बीजेपी ने आंदोलन चलाया। उसकी नींव रखने वाले को बीजेपी सरकार राजकीय सुरक्षा दी रही है, क्योंकि वह जानती है कि हुमायूं कबीर ही उन्हें सत्ता में बनाए रख सकते हैं। हिन्दुओं को भ्रमित करने के लिए कोई न कोई तो चाहिए।

आरएसएस- बीजेपी के नेता जानते हैं कि हिन्दू महज़ जातियों का जमावड़ा है। अगर इस जमावड़े पर राज करना है तो जातियों के जमावड़े को बनाए रखना है और हज़ारों वर्षों की साज़िश को बरकरार रखना है। आरएसएस ने कभी भी हिन्दुओं की एकता के लिए कोई आंदोलन नहीं चलाया। वे मनुस्मृति के उपासक रहे और जातिवाद के पक्के समर्थक। आश्चर्य यह है कि जाति तोड़ने और हिन्दुओं की एकता के लिए बुद्ध, गांधी, अम्बेडकर, कबीर, पेरियार, लोहिया आदि ने काम किया। आरएसएस जाति का समर्थक बना रखा और छद्मद्म दुश्मन तलाश कर हिन्दुओं को ठगता रहा। आज़ादी के बाद आरएसएस ने संविधान की प्रतियां यों ही नहीं जलाई थी और तिरंगे को लगातार अकारण अपमानित नहीं किया था। आरएसएस पंथी को न संविधान चाहिए, न तिरंगा, न आज़ादी के मूल्य।

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प्रोफेसर, पूर्व विभागाध्यक्ष, विश्वविद्यालय हिन्दी विभाग

पूर्व डीएसडब्ल्यू,ति मां भागलपुर विश्वविद्यालय,भागलपुर

डॉ योगेन्द्र
डॉ योगेन्द्र

प्रोफेसर, पूर्व विभागाध्यक्ष, विश्वविद्यालय हिन्दी विभाग

पूर्व डीएसडब्ल्यू, ति मां भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर

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708 Comments

  1. Привет родителям Вечные двойки и тройки в дневнике Нервный как спичка Короче, единственная школа которая работает — школы дистанционного обучения без стресса и нервов Ребёнок реально понимает материал В общем, смотрите сами по ссылке — дистанционное образование [url=https://shkola-onlajn-pqs.ru]дистанционное образование[/url] Переходите на дистант нормальный Перешлите другим родителям

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