शर्म , हया जैसी भावनाएँ राजनीति में रही नहीं, इसलिए न नरेंद्र मोदी जी माफी माँगेंगे, न अमित शाह। मुख्यमंत्री की कुर्सी पर विराजमान अरविंद केजरीवाल को गिरफ्तार कर जेल पहुँचाने वाला सीबीआई अफसर नहीं था। केंद्र की कुर्सी पर विराजमान नरेंद्र मोदी जी और अमित शाह थे। दोनों लोकतंत्र के ‘कट्टर दुश्मन’ हैं, इसमें शक की कोई गुंजाइश नहीं है। इन दोनों ने विपक्षी राज्य सरकारों को गिराने और बदनाम करने की हर कोशिश की और दलाल मीडिया के बूते वे सफल रहे। देश की संवैधानिक संस्थाओं को कैसे लुंज-पुंज कर दिया जा सकता है, इसके लिए नरेंद्र मोदी का शासनकाल सचमुच अमृत काल है।
मुख्यमंत्री के निवास स्थान को नरेंद्र मोदी ने ‘शीशमहल’ कह कर दुष्प्रचारित किया। आज उसी शीशमहल में बीजेपी की मुख्यमंत्री रहती हैं। किसी को कोई शर्म नहीं है। खुद प्रधानमंत्री ने अपने लिए हवाई जहाज, कार, सुरंगें और अपने ऊपर करोड़ों व्यय किया। एक निर्धन मुल्क में, जहाँ अस्सी करोड़ लोग सरकार द्वारा दिए गए अन्न पर पल रहे हों, उनकी ‘अय्याशी’ कहीं से भी जायज नहीं है। अच्छे दिन और किसी के आये हों या नहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र और उनके मंत्रिमंडल के जरूर आये हैं। प्रधानमंत्री का रूतबा किसी राजा से कम नहीं है। ऊपर से अहंकार और अपने को सर्वगुण संपन्न घोषित करने के प्रयत्न। कभी विष्णु के अवतार, कभी नान बायोलॉजिकल बताने की चेष्टा। कभी चंदन टिक्का लगाकर घूम रहे हैं, कभी किसी गुफा में बैठ गए। संविधान की कसमें खाकर संविधान के पन्ने फाड़ते रहना उनकी फितरत है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सत्ता में लाने का श्रेय अरविंद केजरीवाल को भी है। अन्ना आंदोलन में आर एस एस की फौज लगी थी और अरविंद केजरीवाल तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को बदनाम कर रहे थे। आरोप पर आरोप। सोनिया गांधी को लेकर उन्होंने क्या-क्या नहीं कहा। कांग्रेस विरोधी वातावरण बनाया अरविंद केजरीवाल ने और उसका फायदा उठाया नरेंद्र मोदी जी ने। अरविंद केजरीवाल आज आज कैमरे के सामने रो रहे हैं। कैमरे के सामने रोने में नरेंद्र मोदी जी भी अव्वल हैं। दोनों ड्रामा किंग हैं।
अरविंद केजरीवाल कह रहे हैं कि वे कट्टर ईमानदार हैं। अरविंद केजरीवाल जी, झूठ मत बोलिए। आप अब भी कट्टर बेईमान हैं। आप अपनी किताब ‘स्वराज’ याद कीजिए या अपना भाषण याद कीजिए। मैं सरकारी बंगला, कार आदि नहीं लूँगा। और आपने क्या किया? कपिल मिश्रा से गाली दिलवाई आपने, जिससे आहत होकर योगेन्द्र यादव, प्रशांत भूषण और उनके सभी साथियों ने आम आदमी पार्टी को त्याग दिया। आपने अपने साथियों के साथ छल कम नहीं किया। कपिल मिश्रा तो बीजेपी के तलवे चाट रहे हैं। योगेन्द्र यादव आज भी देश – समाज की वाणी बने हुए हैं और आप कैमरे के सामने रो रहे हैं। आपको तो मनमोहन सिंह, सोनिया गांधी, शीला दीक्षित, योगेन्द्र यादव, प्रशांत भूषण, आनंद कुमार आदि से माफी माँगनी चाहिए और माफी आम जनता से भी माँगनी चाहिए कि आप अपने कहे हुए पर स्थिर नहीं रहे। और आपके लोकपाल का क्या हुआ जिसके लिए आंदोलन चलाया गया था। आपने एक आंदोलन की भ्रूण हत्या की है।
देश को छलने में न नरेंद्र मोदी जी पीछे हैं, न अरविंद केजरीवाल। नरेंद्र मोदी जी ने जो कहा, उसके उलट किया। दोनों एक ही राह के राही थे, इसलिए आगे चल कर एक ने सोचा कि अब एक को निबटा दिया जाय। नरेंद्र मोदी और अमित शाह इस खेल में माहिर हैं। उन्होंने वाकायदे राज्य की चुनी हुई सरकारों को निबटाया है। ईमानदारी ईमानदारी होती है, कट्टर ईमानदारी क्या होती है? कट्टरता कोई भी हो, वह न केवल अतिरेक होता है, बल्कि उसमें आदमी के छलद्म छिपे रहते हैं।

प्रोफेसर, पूर्व विभागाध्यक्ष, विश्वविद्यालय हिन्दी विभाग
पूर्व डीएसडब्ल्यू,ति मां भागलपुर विश्वविद्यालय,भागलपुर







