इन दिनों : आप कहाँ हैं अरावली के शेरो!

"अगर आपकी आँखों पर भी नारे और वादों की पट्टी है या नेताओं के धूर्त-जाल में फंस गए हैं तो अरावली से लेकर तमाम नदियों, सागर, जंगल, जल आदि को लुटने दीजिए। ऐसी हालत में इस धरती पर अंततः फंसड़ी लगाने के सिवा कोई विकल्प नहीं है।" - इसी आलेख से
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प्रोफेसर, पूर्व विभागाध्यक्ष, विश्वविद्यालय हिन्दी विभाग

पूर्व डीएसडब्ल्यू,ति मां भागलपुर विश्वविद्यालय,भागलपुर

डॉ योगेन्द्र
डॉ योगेन्द्र

प्रोफेसर, पूर्व विभागाध्यक्ष, विश्वविद्यालय हिन्दी विभाग

पूर्व डीएसडब्ल्यू, ति मां भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर

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4 Comments

  1. सवाल यह उठता है कि देश दुनियां कोई ऐसी स्तिति से कैसे उबारा जय. सरकारी बनने की कहानी कुछ और होती है और बन जाने के बाद कहानी पलट जाती है, आम जान करें तो क्या करे.

    • ठीक कहा है डॉक्टर साहब आपने कि सरकार बनने के बाद कहानी पलट जाती है। इसलिए लोगों में सतत जागरूकता की जरूरत है कि वे सरकार को उँगली दिखा सकें।

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