इन दिनों : कमाबे लंगोटिया, खाय लंब धोतिया

" राजनीतिक दलों के लिए खून-पसीना बहाते हैं उसके कार्यकर्ता, मगर कार्यकर्ताओं पर नेताओं को भरोसा नहीं होता, इसलिए गोदाम में पड़े अपने पुत्र-पुत्रियों को धो-पोंछ कर व गाल पर पाउडर मल कर निकाल लाते हैं। और फिर उनके जयकारे लगने लगते हैं।" इसी आलेख से
जन पत्रकारिता को समर्थन देने के लिए उपर्युक्त QR Code को स्कैन करके 20, 50 या 100 रुपये की सहायता राशि प्रदान कर सकते हैं।
जन पत्रकारिता को समर्थन देने के लिए उपर्युक्त QR Code को स्कैन करके 20, 50 या 100 रुपये की सहायता राशि प्रदान कर सकते हैं।

प्रोफेसर, पूर्व विभागाध्यक्ष, विश्वविद्यालय हिन्दी विभाग

पूर्व डीएसडब्ल्यू,ति मां भागलपुर विश्वविद्यालय,भागलपुर

डॉ योगेन्द्र
डॉ योगेन्द्र

प्रोफेसर, पूर्व विभागाध्यक्ष, विश्वविद्यालय हिन्दी विभाग

पूर्व डीएसडब्ल्यू, ति मां भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर

Articles: 119

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *