इन दिनों : आधुनिक सभ्यता का स्याह चेहरा

सभ्यता का तक़ाज़ा है कि लोग शांति और सुख की ओर बढ़ें। लेकिन विश्व में हड़पने की होड़ ने हत्याओं और विनाश का अंतहीन दौर चल पड़ा है। हमारी सभ्यता का आज यही चेहरा बन गया है।
शान्ति नहीं तब तक जब तक
सुख-भाग न नर का सम हो
नहीं किसी को बहुत अधिक हो
नहीं किसी को कम हो।
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प्रोफेसर, पूर्व विभागाध्यक्ष, विश्वविद्यालय हिन्दी विभाग

पूर्व डीएसडब्ल्यू,ति मां भागलपुर विश्वविद्यालय,भागलपुर

डॉ योगेन्द्र
डॉ योगेन्द्र

प्रोफेसर, पूर्व विभागाध्यक्ष, विश्वविद्यालय हिन्दी विभाग

पूर्व डीएसडब्ल्यू, ति मां भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर

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